सुदंर कहानी ..
एक महात्मा जी थे ।वो एक दिन नदी के पास हो कर जा रहे थे ।उनकी नजर पानी में बहते एक बिच्छू पर पड़ी ।
उनका दिल दुःखी हो गया ।वे पानी में उतर गये और बहते बिच्छू को हथेली पर रख कर निकालने की कोशिश करने लगे ।
पर वह बिच्छू उन्हें डंक मार कर पानी में गिर जाता था ।ऐसा उन्होने कयी बार किया ।एक राहगीर वहाँ से जा रहा था वह यह देख रहा था ।उसने महात्मा जी से कहा कि आप इस बिच्छू को क्यूं बचाना चाहते हैं ।यह हर बार डंख मारता हैं ।
तब महात्मा जी ने कहा इसका स्वभाव डंख मारना हैं और मेरा स्वभाव उसे बचाना ।अंत में उन्होने उस बिच्छू को बचा ही लिया ।
इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है कि अपना स्वभाव परोपकारी रखना चाहिए ,वही सामने वालों को बदल सकता है ।परोपकार से बढ़ कर दुनिया में कोई बड़ा पुण्य नहीं हैं ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ,गुजरात ।