सुदंर कविता ..
विषय .इन्द्रधनुष ..
इन्द्रधनुष का सुहाना नजारा ,सबके दिल को भा जाए ।
इन्द्रधनुष के रंग सुहाने ,सबके चित्त चुरा जाए ।।
इन्द्रधनुष प्रकृति का अनोखा नजारा ,सबके मन हरषाए ।
बरसात ऋतु का सुदंर गहना ,सब के मन को चकराए ।।
जब बारिश की बुंदें आसमान से ,गिरना शुरु हो जाए ।
अचानक सूर्य की किरण उन पर ,गिरना शुरु हो जाए ।।
तब अचानक यह सुदंर नजारा ,आसमान में दिख जाए ।
बडा सुहाना यह नजारा ,सबको आश्चर्य में डाल जाए ।।
सप्तरंगी यह नजारा ,चाँद के आकार का आधा दिख जाए ।
सबकी अंखियाँ इसे देख कर ,देखने को लालायित हो जाए ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला .अमदाबाद ,गुजरात ।