कल भीड़ में खुदसे मुलाकात हुई।
कितना जीते हो खुद के लिए और प्रश्नोंकी बरसात हुई।
एक तो गर्मी से तन पसीना हुवा था।
सहयात्रियों के बातोंसे,
अजीबोगरीबों हरकतोंसे,
मन परेशान हुवा था।
दुसरों को नसींहत देना आसान है।
जब जी सलाह दे दे तो जीया क्याँ करे।
माना नहीं अब क्या करे,
आज चलो खुद के जीया करे।