#gandhigiri
बस कंडक्टर से लड़ते हुए कुछ युवा गाली गलौज पर उतर आए तो मैं बोल पड़ा, "कैसे युवा हो तुम लोग लड़ने पर आतुर रहते हो, मानता हूं रोज आते जाते हो तो क्या किराया नहीं दोगे, कुछ कम ही दो", उस पर एक युवा बोला, "ऐसा है, आप ज्यादा गांधीगिरी मत दिखाओ समझे", मैंने कहा बात गांधीगिरी की नहीं है, "कल को तुम्हारे साथ भी ऐसा ही हुआ तो क्या करोगे? किसी की रोजी रोटी मत छीनो, दया और प्रेम का भाव रखो, तुम लोग जैसा चाहोगे देश वैसा ही बनेगा क्योंकि युवा देश की धड़कन है अपने आप को सुधारो फिर देखो" l मुझे लगा किसी पर कोई असर नहीं पड़ा लेकिन अगले दिन जब बस में चढ़ा तो सफर के दौरान उन सभी विद्यार्थियों ने टिकट भी लिये और जरूरतमंद को सीट भी दी | मैं मन ही मन अपनी गांधीगिरी पर खुश था |