सुदंर गजल ..
काफिया .ता ।
रदीफ .कब तलक ।
दिल में कयी शैतानियां लिए धुमता आदमी ।
मानवता का खुद पाठ पढेगा कब तलक ।।
हर पल फितरत बदलता है आदमी ।
झुठ का पर्दा हटायेगा कब तलक ।।
देश हित कभी सोचता नही आदमी ।
देश भक्ति दिल में जगायेगा कब तलक ।।
अबला पर जुल्म ढा रहा है आदमी ।
अबलाओं का सम्मान करेगा कब तलक ।।
अपने अभिमान से गर्त में गिर रहा आदमी ।
झुक कर सम्मान का सलीका सीखेगा कब तलक ।।
अपने वचनों से लगातार गिरता आदमी ।
मीठे वचनो को सीख लेगा कब तलक ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।