उनके साथ एकांत में कुछ बाते करनी थी.
इश्क़ की बात थी उन्हें लगी जो बेशर्मी थी.
जान नही वो जान-ए-जहां थे..
वैसे तो थे साथ मेरे पास कहां थे..?
कत्ल ही करदो मेरा जिंदगी नूर कहां थी.?
में था किनारे खड़ा पर वो दूर बेइंतेहा थी..
सांसे चली और दिल जलता रहा..?
ये इश्क़ की हवा दरमियां मेरे बेपनाह थी..!!
✍️mr_मरीचि