सूखा पड़ा था जिसमे उस जीन्दगीमे मेरी,
तुम आये थे तबसे अब्र बन गया था तुम्हारे लिए
धूप में जलने का एहसास जुलसाये न तुम्हे,
औऱ नाही तुम्हारी जिंदगीमें सूखा पड़े कभी।
उसी वजह से बरस रहा था हल्की बूंदाबांदीसा तुमपे,
बावजूद उसके तुम्हारा दूर चला जाना एक अनसुल्जा सवाल था कल तक।
कुछी दिनों से बरस रही बारिश को कोसते लोगो को सुना नही था।
― अर्पण क्रिस्टी