कुछ टी.वी चैनल उदघोषक बजा रहे हैं रणभेरी।
करते तुलना बम गोलों की करते रहते मेरी तेरी ।
एसी है स्टूडियो आपके जानो युद्ध भला क्या है ।
जीवन कीहोती क्षति इससे भला मिला क्या है ।
अपने घर के समाचार क्या रीत गये हैं सारे ।
पढ़लिखे नवयुवक नौकरी हित हैं मारे मारे ।
बच्चा चोरी की अफवाहों से बाजार भरा है ।
आर्थिक मन्दी का दानव मुँह को फाड़ खड़ा है ।
राजनीति के संदर्भों से उत्तर तुमको लेना होगा ।
एनआरसी के घाल मेल पर उनका मत लेना होगा ।
सोचो प्रथम राष्ट्र हित फिर तुम समाचार बाँचो।
क्या है शुद्ध सार्थक सुन्दर निज विवेक से तुम जाँचो।