आप हमारे अटल थे अटल है अटल रहेंगे....पहली पुण्यतिथि में सादर नमन आपको...
भारत कोई भूमि का टुकड़ा नही है ,
एक जीता जागता राष्ट्र पुरुष है।
ये वंदन की धरती है ,ये अभिनन्दन की धरती है,
ये अर्पण की भूमि है, ये तर्पण की भूमि है।
इसका नदी नदी हमारे लिए गंगा है,
इसका कंकड़ कंकड़ हमारे लिए शंकर है।
हम जिएंगे तो इस भारत के लिए ,
हम मरेंगे तो इस भारत के लिए।
और मरने के बाद भी गंगा में बहने वाली,
हमारी अस्थियो को कोई कान लगा के सुनेगा।
तो एक ही आवाज आएगी ,
*भारत माता की जय *
(स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की कलम से)