यादों की दरख्तो पर हमने
कुछ फूल उगाए रखे है ।।
थोड़ा प्यार,थोड़ा अपनापन,
रोज इसमे सिंचा करते है ।।
खूश्बु उसकी साँसो मे भरकर,
खुद को तरोताझा रखते है ।।
कभी रंगो में, कभी पंखूड़ी मे,
तुम्हे मेहसुस किया करते है ।।
कभी मुरझाए ना ये फूल,
तुम्हारी भी ये जिम्मेदारी है ।।
यादो की दरख्तो पर हमने
कुछ फूल उगाए रखे हैं ।।
~~तमन्ना~~