निगाहों से निगाहों में उतरने को जी चाहता है ।
निगाहों निगाहों से निगाहों में उतरने को जी चाहता प्यार के दो गीत गुनगुनाने को जी चाहता है ।
रूठे हुए अपने को मनाने को जी चाहता है ।
मान जाये वो तो खुद रूठ जाने को जी चाहता है ।
अभी तो जिंदगी का फलसफा पूरा है बाकी कुछ कहने , कुछ सुनने को जी चाहता है ।
निगाहों से निगाहों में उतरने को जी चाहता है ।
बाहों में उनकी समा जाने को जी चाहता है ।
बाहों में उनकी समा जाने को जी चाहता है ।
काश कि दिल की धड़कनो को सुन पाते वो साँसों में उनकी उतर जाने को जी चाहता है ।
मिले जो साथ उनका तो भंवरों सा गुनगुनाने को जी चाहता है ।
मिल जाएँ झीलें जो उनकी तो आँखों में उतरने को जी चाहता है ।
जब से देखा है कली सा उनका चेहरा फूलों की तरह खिलखिलाने को जी चाहता है ।
होता नहीं है इन्तजार अब और जरा भी
उन पर जिंदगी को निसार करने को जी चाहता है..
#Shivan