"हर हर भोले"
आर0 के0 लाल
माता पार्वती ने भगवान से पूछा- " प्रभु! यह भक्त सैकड़ों मील दूर से पैदल कांवर लेकर आपके मंदिर में आया। रास्ते भर ओम नमः शिवाय का मंत्र जाप करता रहा। उसने सोचा था मंदिर जाकर अपनी सारी व्यथाओं को आपके सम्मुख रखेगा और आपकी कृपा प्राप्त करेगा। मगर जैसे ही वह लंबी लाइन में लगकर आपके शिवलिंग के सामने पहुंचा पुजारियों ने उसे वहां रुकने ही नहीं दिया और धक्का देकर बाहर कर दिया। वह उदास हो गया। जबकि भारी दक्षिणा देने वालों को मंदिर के गर्भ गृह में आपके शिवलिंग के सामने देर तक पूजा करने का अवसर मिल जाता है। मुझे समझ में नहीं आता कि आप अपने साधारण भक्तों की मदद क्यों नहीं करते?"
भगवान ने समझाया- " जो सबका है वही शिव है। वह व्यक्ति भी मेरा अभिन्न भक्त है, जब भी चाहे मुझे अपने मन में पा सकता है। मुझसे अपनी बात कह सकता है। क्या करना सही या गलत होगा उसका उत्तर भी वहीं से मिल जाएगा।
मगर लोगों की देखा देखी वह भी अपने मन से हटने लगा है। अगर उसे मंदिर में ज्यादा देर रुकने को मिल जाता तो वह अपने मन की अपेक्षा पुजारियों पर ज्यादा विश्वास करने लगता। इस प्रकार वह मुझसे भी दूर हो जाता। इसलिए उसके साथ उचित ही हुआ।"