फ़र्ज़ का क़र्ज़ (भाग दो)
————————-
जम्मू कश्मीर पुलिस का एक सब इंस्पेक्टर एक हवलदार, सेना के एक मेजर के साथ दरवाज़े पर खड़े थे। सेना के जवान ने बहुत अदब से बट्ट साहब को सलाम किया और सब इंस्पेक्टर को इशारा किया। हमें नदीम के बारे में जानकारी चाहिए बट्ट साहब। आवाक से बट्ट साहब एक क्षण को मौन हो गए। फिर संभाल कर बोले । क्या बात है इंस्पेक्टर साहब? बट्ट साहब आप तो जानते ही हैं अभी जो पिछले हफ़्ते सैनिक क़ाफ़िले पर आतंकवादी हमला हुआ था उस मामले में कुछ धर-पकड़ हुई है और साज़िश कर्ताओं में नदीम का नाम भी सामने आया है। आप बताइए इस समय वो कहाँ मिलेगा। क्या बक रहे हो इंस्पेक्टर आपकी तफ़तीश में आया नदीम कोई और होगा। मेरा बेटा तो इंजीनिरिंग की पढ़ाई कर रहा है। माफ़ कीजिए बट्ट साहब हमारी जानकारी पुख़्ता है। नदीम आज कल लश्कर कमांडर अबू आदिल के सम्पर्क हैं और कई बार सीमा पार भी जा चुका है। इस हमले में उसने काफ़ी अहम रोल निभाया है। अहसान बट्ट सन्न हो गए उनके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया। मेरा बेटा आतंकवादियों का साथी? वे बेसुद से हो गए। उनकी तंद्रा तब टूटी जब इन्स्पेक्टर का सर्द स्वर उनके कानों में पड़ा। कहीं आप भी तो..... या आपकी कोई शह तो नहीं आपने बेटे के पीछे? अहसान बट्ट ने दर्द, निराशा और पीड़ा भारी आँखों से इन्स्पेक्टर को घूरा। मेजर ने इन्स्पेक्टर के कंधे पे हाथ रख कर धीरे से सर हिलाया। इन्स्पेक्टर ..... मैंने सारा जीवन देश सेवा में लगा दिया, गोलियाँ भी खाई और अब ज़िंदगी के इस मोड़ पर ये सुनने को मिल रहा है। किस बिना पर आप ये इल्ज़ाम लगा रहे हैं। हमारा अनुमान है बट्ट साहब । हम आप पर कोई इल्ज़ाम नहीं लगा रहे सिर्फ़ शक ज़ाहिर कर रहे हैं और शक करना हमारा पेशा है । हमें पता लगा है की नदीम पिछले एक साल से लश्कर के सम्पर्क में है। और इसी बीच कई बार घर भी आया है। हमें यक़ीन नहीं की उसने आप को कुछ बताया ना हो या आप को कोई भनक ना लगी हो। इंस्पेक्टर आपकी बात मेरे लिए सदमे कम नहीं है लेकिन आप आपकी कार्यवाही करें। क्या मैं ख़ुद को गिरफ़्तार समझूँ? अहसान भट्ट का दर्द छलक कर आँखो से बहने लगा।
अरे नहीं बट्ट साहब हम सिर्फ़ नदीम की जानकारी चाहते हैं। आप से सहयोग की अपेक्षा है। कृपया उसकी कोई भी जानकारी मिलते ही हमें सम्पर्क करें। अभी हम चलते हैं। कह कर सभी वहाँ से बाहर की तरफ़ मूड गए।
क्रमशः।
-दीपक जैन—