??गुरु+पूर्ण +मां =गुरु पूर्णिमा?????????
तू आई पृथ्वी पर जिस दिन गुरुओं का पर्व होता है ,
ईश्वर का प्रेम और गुरुओं का आशीर्वाद रहता है ।
मायूस ना होना जीवन में,
जो पल आता है रुकता नहीं,
खुशी हो या गम समय
कभी ठहरता नही,,
ठहराव को जीवन ने परिवर्तन का नाम दिया।
मां ! कहती है मैंने गुरु पूर्णिमा पर जन्म लिया।
मां के हृदय में जब मेरा अंकुर फूटा,
प्रेम का अथाह समंदर मैंने देखा,
जब मैंने जन्म लिया मां के आंचल में
एक जीवन जी लिया,,
मां के विचारों ने ही मुझे परिपक्व किया।
मां ! कहती है मैंने गुरु पूर्णिमा पर जन्म लिया।
अपनों को पिरो लेना माला में मोती की तरह,
माला मन में भावों की पवित्र रखना।
व्यवहार के धागे से समेटे रखना,
कभी अगर कोई मोती गिर जाए,
तू प्रेम से फिर पिरो लेना।
विवशता में जीवन नहीं,
विवशता में जीवन नहीं,
जीवन में विशेषता को पा लिया,,
उसने ही यह जीवन जी लिया।
मां! कहती है मैंने गुरु पूर्णिमा पर जन्म लिया।????
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