समझदारों की नासमझी पर बड़ा अफसोस होता है !
जो सागर में गिरे दरिया बड़ा खामोश होता है !!
यह चलती आंधियाँ तूफान को अंजाम देती है ,
मिटा देती है हस्ती को सब उसके आगोश होता है !
समय के जो मारे हैं उन्हें क्यों कर सताते हो ?
वह घायल है, बेचारा है, उसे महसूस होता है !
जो जाते रोज मधुशाला वह लाचार आदत से ,
जो नजरों से पिए साकी वही मदहोश होता है !!
जो खुद के लिए जीते उन्हें क्या फर्क पड़ता है ?
वतन पर मिटने वालों का बड़ा एहसास होता है !!
सिकंदर हो गए जो दिलों पर राज करते हैं,
मुक़द्दर के सताए हैं वही बदहवास होता है !!
जहां दो दिल मिलते हैं चमन के फूल खिलते हैं,
कुछ खोकर ही यारों हासिल विश्वास होता है !!
नमिता "प्रकाश"