? Jay siyaram?
?दातव्यं भोक्तव्यं धनविषये सञ्चयो न कर्तव्यः । पश्येह मधुकरिणां सञ्चितमर्थं हरन्त्यन्ये ॥?
- भावार्थ :
धन दूसरों को दिया जाना चाहिए, अथवा उसका स्वयं भोग करना चाहिए । किंतु उसका संचय नहीं करना चाहिए । ध्यान से देखो कि मधुमक्खियों के द्वारा संचित धन अर्थात् शहद दूसरे हर ले जाते हैं ।