चार भीड़वादी शेर
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दिन ब दिन बढ़ने लगी हैं भीड़ की बदमाशियाँ
आदमी हैं या दमे की बिन बुलायी खाँसियाँ 1
भीड़ भिड़कर कट मरी जब बेवजह
वजह के चेहरे वजह पर अब पढ़ेंगे मर्सिया 2
जिनकी वजह से बेवजह मारे गये थे हम
अब फिर वजह निकाल के लूकी लगा गये 3
काल उपसंहार गति गुस्ताख़ होने जा रही है
जिन्दगी कब खाक फांके? राख होने जा रही है 4
Kuber Mishra