कोई देखें ना
पुंज रहे हैं पीपल तुलसी
कटते पेड़ कोई देखें ना।
जल जीवन है जलती प्यास बुझाए जल
गंगा मैली सुखती नदियाँ कोई देखें ना।
रचा हुआ इतिहास हैं गौरव है गर्व पहचान हैं
जर-जर होता पतझड़ होता इतिहास
कोई देखें ना।
भारत की संतान हैं भविष्य जो अनजान है
वो भटकते बच्चे कोई देखें ना।
सब बने न्यायधीश
हो रहा अन्याय कोई देखें ना।
धर्म जिस का उसका सबका अपना अपना
होते वीरान मंदिर मस्जिद कोई देखें ना।