दुनिया में कोई दोस्त कोई जानी ना मिला,
दुश्मन बहोत मिले कोई खानदानी ना मिला।
हमारे ग़म भी खुशियोँ में बदल जाते,
हमें कोई तावीज़ सुलेमानी ना मिला।
कुंआं खोदने वाले प्यास से मर गये,
जिनका हक़ था उनको पानी ना मिला।
मिलना है तो पाक जज़्बे से मिला कर,
पाकीज़ा दोस्ती में जज़्बा शैतानी ना मिला।
ज़ालिम से अपना हक़ तो "पागल" ने छीना,
बड़ी मुश्किल से मिला भी आसानी ना मिला।
✍?"पागल"✍?