जीवन तो है खेल तमाशा, चालाकी नादानी है,
तब तक जिंदा रहते है हम जब तक हैरानी है।
आग हवा मिट्टी पानी मिल कर रहते कैसे है,
देख के खुद को हैराँ हूँ, जैसे ख्वाब कहानी है।
मंज़र को आखिर क्यूँ मैं पहरों तकता रहता हूँ,
ऊपर ठहरी चट्टानें है, तह में बहता पानी है।
मुझको एक बीमारी है नींद में चलते रहने की,
रातों में भी कब रुकता है मुझ में जो सैलानी है।
कल तक लोग जिस तरह मुझको दुत्कार देते थे,
दोस्तों वही दुनिया आज "पागल" की दीवानी है।
✍?"पागल"✍?