भाई से ज्यादा न कोई उलझता है,
भाई से ज्यादा न कोई समझता है।
ये एक निस्वार्थ प्यार है संसार का,
भाई से ज्यादा न कोई संवारता है।
पूरे परिवार में बहन का दिल सिर्फ,
भाई से ज्यादा न कोई बहलाता है।
बात बात पर रूठी हुई बहन को,
भाई से ज्यादा न कोई मनाता है।
बहेन के दिल की हर एक बात,
भाई से ज्यादा न कोई मानता है।
बहेन से हर घड़ी हर पल हर वक़्त,
भाई से ज्यादा न कोई उलझता है।
पागल के पागलपन को दुनिया में,
बहेन से ज्यादा न कोई समझता है।
"पागल"