Megha in matrubharti
विषय:पिया बावरी प्यारी सी पत्नी।
हूं मैं एक प्यारी सी धारा।
कभी हूं आकांक्षाओं से तपती,
तो कभी कामनाओं से तृप्त।
तुम हो मेरे प्यारे आशमान,
कभी बरसते अन्नत प्रेम,
तो कभी सुलगती धूप,
न देते कभी छाव,
और आगोश में जब आ जाती तो,
खिल जाती देह मेरी हो जाती अंकुरित मै।
धरती और आसमान मिल जाते उस शितिज पर,
इंद्रधनुषी खिल जाता सात सुन्हरी रंगो से,,
तब हो जाता पवन संगम।
किरणों के सिंदुरी रंग से सजी मांग पिया।
तुम मेरे प्यारे आश्मा,
मै तुम्हारी प्यारी धारा।
मेघा....