कुछ राज,राज ही रहे तो अच्छा
दिल के कोनो मे दफन रहे तो हि अच्छा
कुछ राज खुलते ही
रीश्ते करवट बदल देते है
अपने पराये और पराये अपने बन जाते है
कही तूफा तो कही धूआ सा उठता है
कीसीके तकिये के नीचे
अरमानो का तालाब भर जाता है
कुछ राज,राज ही रहे तो अच्छा
हेमांगी