Megha in matrubharti
प्रचण्ड वेग से उतरा है....
आज फिर कीचड़ में कमल खिला है।
आए मार्ग में कई भयंकर तूफान हैं
वो फौलादी हौसले लिए आगे बढ़ा है।
आज फिर कीचड़ में कमल खिला है।
सच्चाई, विश्वास, मजबूत इरादों कि लाठी लिए,,,,
चौकीदार फिर सज़ग हुआ है।
प्रचंड वेग से उतरा है,,,,
आज फिर कीचड़ मेंकमल खिला है।
केसरिया की अान,बान,शान,की खातिर,,,,,
अटल,,,,,अटलजी के सपनो को सच करने फिर चला है।
प्रचण्ड वेग से उतरा है,,
आज फिर कीचड़ में कमल खिला है।
मातृभूमि को नमन
मेघा....✍?