#KAVYOTSAV -2
बारिश अब तू पड़ती नहीं,
सूखे खेत-खलिहानों में,,
पक्षी चहके कोयल कूके,
क्यूँ नाचे मोर बागानों में?
इस कदर तू नाराज हुई,
इंशा के अत्याचारों से,,
वनों के चोर जमीं के लोभी,
खुदगर्ज मशीनी लोगों से।।
एक दिन ऐसा आएगा,
जब तू गायब हो जाएगी,,
वृक्ष न होगा कोई धरा पे,
दुनिया कैसे रह पायेगी।
ये बात इन्हें समझानी है,
कुछ तो जुगत भिड़ानी है,,
जल है जीवन का सार,
मत करो इसे व्यर्थ बेकार,,
वृक्ष लगाओ सब बारम्बार,
बचा लो अपना ये हसीं संसार।।
"राजीव कुमार गुर्जर"