आहवान
तुम आओ मेरे साथ
नहीं बनाऊँगा
गौतम गाँधी, भगतसिंग, आजाद
नहीं सुनाऊँगा
गीता, बाइबिल या कुरान
न ही कोई उपदेष
मैं सिखाऊँगा प्रेम
आत्मा परमात्मा के प्रति नहीं
प्राणी मात्र के प्रति
बनाऊँगा परिवार, समाज, देषहित आदमी
नहीं बनने दूँगा
दोपाया जानवर तुम्हे।