#काव्योत्सव2 #भावनाप्रधान
तुम्हारे होने का
एहसास ही
हरा भरा कर देता है
घर के ,मन के ,आँगन को
सिर्फ "देह "से कोई मौजूद हो साथ
यह सोच ही बे बुनयादी है
जो बसा हो
आत्मा के अंतस में
जीवन रस की तरह
वह कहाँ फिर दूर होता है....?
गवाह है यह लिखते हुए हर लफ्ज़
जिसके हर भाव में
सिर्फ रूप ही तुम्हारा है
#ranjubhatia