#शायरी
आज की जनरेशन की सोच को दर्शाती एक रचना।एक एसी सोच जो किसी के लवो पर तो नही होती है पर फेसबुक पर इस सोच के कई उदाहरण बडी आसानी से मिल जाते है और लडका हो या लडकी इस तरह की घटनाये किसी के भी साथ अकसर घटित हो जाती हैं।
प्रस्तुत हैं रचना
"फेसबुक बाला प्यार "
मिली थी कोई अजनबी
बडी सुहानी बो लगती थी
उसकी एक मुस्कूराहत पर
मेरी हसी भी खिलती थी
हुआ प्यार बेहिसाब उससे
पर अपनी कहा बो लगती थी
उसकी एक हसी पर मानो
जान हमारी निकलती थी
पोस्ट को उसके लाईक कर कर
कॉमेंट में वाह-वाही लूटी थी
दिन दिन बाते करके उससे
उसकी खुशी भी लूटी थी
उसने समझा अपना हमको
हमने तो बस की दिललगी थी
तोडा जब दिल को उसके
रो रो कर आंखें उसने फ़ेरी थी
थे सबाल लाखो लवो पर उसके
पर फ़ेस उसको करने की
हिम्मत कहा बो हममे थी
बादे किये हजार उससे
पर एक निभाना ना चाहा कभी
अपनी थी पर अपनी नही
क्यूँ कि शादी अपनी
घरवालो की मर्जी से जो करनी थी
खूब खेला दिल से उसके
पर बो थी कि हमपे मरती थी
धोखा देकर शायद उसको
कोई गलती हमने कर दी थी
चमकती आखों में उसके
अस्को की नदिया भर दी थी
रोते बिलखते छोड कर उसको
हमने राह अपनी बदली थी
ब्लोक कर बात्सव नम्बर उसका
फेसबुक से उसकी
आई डी अलग भी कर दी थी
नम्बर बदल कर हमने अपना
राहे सभी ही बन्द कर दी थी
जाने कहा फिर बो गयी
ये जानने की कोशिश
कभी ना हमको करनी थी
बो जिये या मर जाये
अपनी कौन बो लगती थी
ना रिलेटिव मेरी थी
ना मेरे घर की रोनक थी
फेसबुक पर मिली एक अजनबी
जाने बो किसकी बैटी थी
होगी बहन किसी की पर बो
मेरी कुछ ना लगती थी
मैने तो इन्जोए की खातिर
दोस्ती उससे करली थी
✍ RJ Krishna ✍