#KAVYOTSAV -2
किसी शहीद के बच्चे ने होली पर अपने पापा का किस प्रकार इंतज़ार किया होगा कुछ पंक्तियाँ सम्मान में समर्पित है ??
घर के द्वार पर वो बैठा करता इन्तजार,
जल्दी से आयें पापा कर दूँ रंगो की बौछार,,
ना ज़ाने कब से पापा घर अपने आयें हैं,
टॉफी चॉकलेट मिठाई कुछ भी ना लाये है,,
आज जो आयेंगे तो उनसे खूब लडूंगा,
बोलूंगा ना कोने में कहीं जाके छुपुंगा,,
शिकायतें हैं सबकी मैनें लिख के रखी है,
पापा से जो है कहना सब सोच रखी है,,
होली है फिर भी घर ये कितना सूना सूना है,
रँग है ना रौनक बस रोना रोना है,,
मम्मी ने गुंजिया तक है ना इस बार बनायीं,
ना रँग ना गुलाल ना पिचकारी दिलायी,,
सब है मुझसे कहते पापा अब ना आयेंगे,
देश पर हैं मर मिटे वो पूजें जायेंगे,,
मैं क्या ज़ानू बालमन क्या उनको चाहिएँ,
संवारने बचपन मेरा मेरे पापा मुझको चाहिएँ।
संवारने बचपन मेरा मेरे पापा मुझको चाहिएँ।।
"राजीव कुमार गुर्जर"