मेरी आशिकी सीर्फ तुमसे ही।।
क्या सुहाना मौसम है,
और वक्तका भी क्या मीजाज है।
इन मधुर पलो मे काश तुम मेरे पास होती।
मुझे ये मालूम है कि तु मुझसे खफा नही है।
तु तो मेरी इस मुफलिसी से खफा है।
लेकिन मै करु तो, करु क्या ?
इस दौर मे मेरी महोब्बत कि बैसुमार दोलत कि,
किम्मत भी तो कुछ नही है।
क्योकी अगर होती तो,
तुम मुझे यु सरे बाजर नीलाम कर नही जाती।
यू तो लोग कहा करते है,
वाह रे तेरी महोब्बत पैसो के पीछे भाग गयी।
लेकीन यह तो तेरी बात हुई, पर
मेरी आशिकी सीर्फ तुमसे ही।
-रेरा