#KAVYOTSAV -2
गरीबी
फ़टे कपड़े से बदन ढका है
बासी रोटी से पेट अधभरा है
तृप्त है फिर भी ऐसे जीवन यापन से
जीवन कहाँ साधारण उसका है
भाग्य का ही होगा तेज
जो अलीशान बंगले में बैठा है
वरना मेहनती लोगों को तो
झोंपड़ी के लिए भी तरसते देखा है
गर कहता नहीं वो गरीब दर्द अपना
पर दर्द उसको भी खूब होता है
रखता है शायद वो उम्मीद कोई
पर मन ही मन खूब रोता है
मुँह फेर लेता है हर शख्स उससे
पर वो सबसे हँस कर मिलता है
देखे आस भरी नज़र से सबको
कोई ना उस पर तरस खाता है
कट ही जाता है जीवन सफर उसका
पर क्या जीवन यही कहलाता है
मिला आजीवन संघर्ष बस
वो गरीब घुट-घुट कर मर जाता है
©vineetapundhir