kavyotsv 2
स्वरचित
मैं आउंगी
जब तुम मेले में भी अपने को अकेला पाओगे।
अपनों की भीड़ में भी खुद को जब तुम बेगाना पाओगे।।
तब मैं आउंगी ......तब मैं आउंगी।
आंधी के गरम थपेड़े जब तुमको अंदर तक झुलसायेंगे।
दुनिया के ताने मनमाने अन्तस् का क़तल कर जायेंगे।।
तब मैं आउंगी ........तब मैं आउंगी।
मुझ बिन जीने का अहंकार जब घुटनों तक आजायेगा।
आएगी वीराने की आहट अंधियारों में जीना मुश्किल हो जायेगा।
तब मैं आउंगी.........तब मैं आउंगी।
माना तुमने अपने आगे मुझको न कोई मोल दिया।
मेरे अरमाँ मेरी खुशियों को अपने पैरों से रौंद दिया।।
फिर भी मैं आउंगी ........मैं आउंगी।
जब तड़पोगे पल पल मेरे लिये चिल्ला कर मुझे बुलाओगे।
आवाज लौट आएगी पर मुझको न कहीं तुम पाओगे।।
तब भी मैं आउंगी........मैं आउंगी।
क्योंकि मैंने तुमको जन्म दिया मैंने ही तुम्हारा वरण किया
अपना हर सुख और तन मन धन सब तमको ही समर्पण किया।।
इसीलिए मैं आउंगी........मैं आउंगी।।
मैं अपनी ममता करुणा अर्पण से खुद ही तुम से हारी हूँ।
पर तुम हारे हो बार बार मैं फिर भी तुम पर भारी हूँ।।
क्योंकि मैं नारी हूँ.......मैं आउंगी।
पर और अधिक अपमान हुआ तो मेरा धीरज ढह जायेगा
मैं जो तुम से रूठ गई तो दुनिया का सृजन अधूरा ही रह जायेगा।
फिर मैं कभी न आउंगी....कभी न आउंगी.......
कभी न आउंगी।।
जमीला ख़ातून
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