बारिस की बूँदों की तरह
मेरी रूह को छू जाए जो
साँसों में खुश्बू बनकर
मेरे तन मन को महकाए जो
मेरी इस विरान ज़िन्दगी में
जीने की उम्मीद जगाए जो
भटक रही होऊँ गर कभी
मुझे मेरी राह दिखाए जो
डर जाऊँ जो अकेलेपन से
साथ मेरे कदम बढ़ाए जो
वो ख्वाहिश ही बस बन जाओ
मेरे हर मोड़ पर बस मेरी ही हो जाओ
जो चाहूँ मैं दिलो जान से
वो फरमाइश बन जाओ
मैं माँगूं हर दुआ में तुझको
वही गुजारिश बन जाओ
मुझमें हो बस तू ही तू
मेरी वही नुमाइश बन जाओ।।