#काव्योत्सव 2
विषय - प्रेरणादायक
कानपुर की मेस्टन रोड
और
मेस्टन रोड की वो सकरी गली -
गंदी,बदबूदार
पर लोगों से भरी।
हम तुम साथ-साथ
भीड़ में चल रहे थे।
अचानक दिखा
एक पिल्ला
कूँ - कूँ कर भटकता, तड़पता,
घुटती साँसों संग
नन्हें हाथों से की जाती
उसकी नाकाम कोशिश
मुँह पर फंसे प्लास्टिक को हटाने की।
सोचा मैंने - क्या करूं ?
मानवता ने पैर पसारा पर गंदगी ने सोच में डाला
दुविधा में ठिठकी **** एक पल
पर
तुम न रूकीं
आगे बढ़
खींच दिया वो प्लास्टिक और दिया जीवनदान।
उस पल
तुमसे कुछ सीखा है
कुछ जाना है,
मानवता के रूप में
तुमको पहचाना है।
श्रद्धा से सिर झुकता है
शत्-शत् नमन
शत्-शत् नमन
नीलिमा कुमार