छुपा रखा था दिल के किसी कोने मे
अब दर्द ए इश्क़ फिर से दस्तक देने लगा
वो अजनबी बनकर गुज़र गया संग रक़ीब
उसका यूँ नज़रे चुराना याद आने लगा
मिटाकर चल दिए थे क़दमों के निशा
हर रास्ते पर वो आज कल टकराने लगा
दर्द को शायद मिल जाए सफ़ा दुआ करना
दिल फिर से उसकी चौखट पर मरने लगा