Hindi Quote in Thought by Rajendra Pratap Singh

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हम,हम न होते

गर न होता ए ज़हां,
तो हम कहां होते?
गर न हम होते, तो
फिर ये जाति, धर्म कहां होते?
गर जहां को जहां औ
हम को हम ही रहने देते
तो क्या बुरा था?
विवेकशील होने से तो,
विवेकहीन होना ही अच्छा था।
नित नए प्रयोग कर,
जीवन को सरल से दूभर न करते।
धरा से नभ तक जाकर,
पाताल में गिरने से अच्छा था
कि न जहां होता,न हम होते।
उम्र के इस पड़ाव पर सोचता हूं,
इंसा ने इंसान को क्या बना डाला?
आदमी को आदमी ही रहने देते,
तो क्या बुरा था?
लगता है हम जहां से चले थे,
फिर वहीं पहुंच कर ही दम लेंगे ।
समय के चक्र से कौन बच पाया है?
भ्रम में भटककर फ़िर राह पर आएंगे।
जन्म से मृत्यु तक का ये चक्र कैसा?
ना समझ सके,ना समझ पाएंगे।
हम मानव सुख की चाहत लिए ही,
इस जहान से चले जाएंगे।
राजेन्द्र प्रताप सिंह

Hindi Thought by Rajendra Pratap Singh : 111139504
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