Quotes by Rajendra Pratap Singh in Bitesapp read free

Rajendra Pratap Singh

Rajendra Pratap Singh

@rajendrapratapsingh5628


धूप और छांव का सम्मिश्रण है ज़िन्दगी,

सुख और दुख का एहसास है ज़िन्दगी।

क्या दिन थे जब नंगें पांव दौड़ मेडल लाते

अब एक कदम चलना भी हमें नहीं सुहाते।

ज़िन्दगी की डगर में धूप- छांव आते ही रहेंगे,

हौसले बुलंद हों तो राह आसान हो जायेंगे ।

नफ़रत को नफ़रत से हराया नहीं जा सकता,

पर मोहब्बत के प्रयास से जीता जा सकता ।

धूप की तपिश भी ज़रूरी, छांव भी ज़रूरी

प्रकृति ने जो दिए, ज़िन्दगी में सभी है ज़रूरी।

आज़ को भोगों कल को सींचो, कल के लिए

प्रकृति के साथ चलो, संचित करो कल के लिए।

Read More

हे प्रबुद्ध मानव तू इतना निष्ठुर और कठोर कैसे

उसे ही खत्म करने पर आमादा, जो जीवन रक्षक

जीवन साथी बना रहा तुम्हारा, जन्म से मरण तक ,

तुम्हें ऐसा करने से रोकने के लिए कानूनी प्रतिबन्ध ?

मैं पेड़ तुमसे पूछे रहा, क्यों जब तब कुल्हाड़ी और

रस्सी लिए मुझे काटने चले आते हो, गुनाह तो बता

बिन मांगे हमने तुम्हें वह सब कुछ दिया जो पास था

तुम्हारे सहायक बन, वातावरण नियंत्रित कर, शुद्ध-

जल, वायु, फल, फूल, छाया देते रहे और अन्त के

बाद अपना शरीर, तुम्हारी सुख सुविधा का सामान

बनाने, तुम्हारे अन्त के बाद तुम्हें ले जाने, जलाने में ।

जब हम न रहेंगे, बहुत पछताओगे, सब खो चुके होगे

न आक्सीजन, न प्राण, पृथ्वी इतनी गर्म हो जाएगी

कि न भोजन, न पानी, जीवन विहीन पृथ्वी हो जाएगी ।

जागो हे मानव जागो, बीत रहा समय है, अब तो जागो ।

Read More

शीर्षक- बेटी

 सृष्टि की अतुलनीय रचना हैं बेटियां।

जन्मदाता की जन्मदायिनी हैं बेटियां, 

धन्य वो माता-पिता जिन्हें हैं बेटियां।   

 सृष्टि की सुन्दरतम रचना हैं बेटियां, 

 सम्पूर्ण सद्गुणों की भंडार हैं बेटियां‌।

 तभी तो लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती , 
 
पार्वती से प्रभावित हो शिव ने धरा ,   
 
अर्धनारीश्वर रुप, धन्य हैं बेटियां।  

सृष्टि की अतुलनीय रचना हैं बेटियां।

 बेटी तेरे रूप अनेक, बहन, भाभी , 

मां, दादी, परिवार बनाए भी तूने।
 
सृष्टि को आगे लेकर जाती है, बेटी,                             

जीवन साथी कहलाती हैं बेटियां।


                       

हर क्षेत्र, हर विधा में आगे बेटियां 

शिक्षक बन शिक्षा देती, आईएस                   
लीडर,

वैज्ञानिक, ट्रेन-बस,ट्रक चालक,
 
 हवाई जहाज पाइलट बनी बेटियां।

सृष्टि की अतुलनीय रचना हैं बेटियां।

                                 ‌‌‌‌          

Read More

मानस की वेदना मन ही जाने  

शब्द जो निकलें, भेद ही खोलें    

बिन बोले, बस राम ही जाने   

या फिर चतुर ही पहचाने।

Read More

Good evening 😊

अंधेरे में जीने वाले घबराऐ, बौखलाए हैं
उजाला आने को है सुबह की पौ फटने को है
आशा की लाल किरणें छितिज पर दिखती हैं
मन में बि़्शवास जगाओ आशा को पास बुलाओ
नकारात्मकता को अब सकारात्मकता में बदलो
हमने अनेकों कठिनाइयों को सुना ,देखा, झेला है
फिर आज क्यूं घबरा गये धैर्य क्यूं खोने लगे
पहले भी महामारियां आई हैं कोरोना कुछ नया नहीं
अचानक ज़रूर है अधिक बिनाशक भी है
मानव इसे भी हराएगा फिर बीते दिन, भूल जाएगा
वापस लौटेगी ज़िन्दगी नया जोश ,नई राह पकड़ेगा

Read More

ब्यथित ह्रदय की पीड़ा कैसे ,किसे बताएं ,
अन्तर्मन का द्वंद किन शब्दों में ब्यक्त करें।
मन भटक रहा हर पल उलझन हैं सारी ,
क्या जतन करें , कैसे धारण करें विवेक ।
हे ईश्वर अब तू ही मालिक, तू ही राह दिखा,
दूर करो अंधेरा मन का रोशन कर दे राह।

Read More

ज़िन्दगी भी अजीब है ,न खुशी समझ आई ,न ग़म ।
न, अपनों की समझ आई,न ही परायों की ।

LIFE v/s HAPPINESS
Down the lane of journey, passing through odds and evens of life.
Enjoying HAPPINESS with family and friends,
Reached to a point, where I find one and all,
Fighting against the handicaps of age.
Are we not forced to think, "What is life"?
Start looking for peace of mind,
Moments of happy hours.
Friends who can spare time,
To sit along , share their thoughts,
Health hazards faced day to day,
Some times generating courage,
To fight & win over or surrendering,
Finding ways to reciprocate love,
What was the win-win time situation,
Prevailing time wheel to come here.
Never ever thought & bothered for,
Where should I go & where going ?

Read More

LIFE v/s HAPPINESS
Down the lane of journey, passing through odds and evens of life.
Enjoying HAPPINESS with family and friends,
Reached to a point, where I find one and all,
Fighting against the handicaps of age.
Are we not forced to think, "What is life"?
Start looking for peace of mind,
Moments of happy hours.
Friends who can spare time,
To sit along , share their thoughts,
Health hazards faced day to day,
Some times generating courage,
To fight & win over or surrendering,
Finding ways to reciprocate love,
What was the win-win time situation,
Prevailing time wheel to come here.
Never ever thought & bothered for,
Where should I go & where going ?

Read More

हम,हम न होते

गर न होता ए ज़हां,
तो हम कहां होते?
गर न हम होते, तो
फिर ये जाति, धर्म कहां होते?
गर जहां को जहां औ
हम को हम ही रहने देते
तो क्या बुरा था?
विवेकशील होने से तो,
विवेकहीन होना ही अच्छा था।
नित नए प्रयोग कर,
जीवन को सरल से दूभर न करते।
धरा से नभ तक जाकर,
पाताल में गिरने से अच्छा था
कि न जहां होता,न हम होते।
उम्र के इस पड़ाव पर सोचता हूं,
इंसा ने इंसान को क्या बना डाला?
आदमी को आदमी ही रहने देते,
तो क्या बुरा था?
लगता है हम जहां से चले थे,
फिर वहीं पहुंच कर ही दम लेंगे ।
समय के चक्र से कौन बच पाया है?
भ्रम में भटककर फ़िर राह पर आएंगे।
जन्म से मृत्यु तक का ये चक्र कैसा?
ना समझ सके,ना समझ पाएंगे।
हम मानव सुख की चाहत लिए ही,
इस जहान से चले जाएंगे।
राजेन्द्र प्रताप सिंह

Read More