*" न बेहला फुसला कर न लालच देकर आए आए चले जाए चले जाए पर अच्छा करते रहे तो बुंद बुंद सागर भर जाए "*
अच्छा करने का बहोत मन होता है जोश भी होता है | पर एक साथ सेंकड़ों लोग सुधर जाए ऐसी कामना होती है | पर ऐसा न होने पर जोश धीमा होते होते खत्म हो जाता है | पर बुंदबुंद मीला कर सागर भरना होता है | इसलिए अपनी बात को रखना है जीसे अच्छा लगे वो अपने आप जुड़ते जाते है | लालच देकर या बहेला फुसला कर आने वाले को ओर कोई बेहला फुसला लालच देकर ले जाता है | फिर सीलसीला शुरु हो जाता है | दो बिल्लियों के बीच तो बंदर मजे लुट ही लेता है | तो करना ये है कि बात रखनी है जीसे पसंद जुडे जुडने के बाद चला जाए भले जाए अच्छा लगे तो फिर वापस आ जाए | बस सब समान न कोई गुलाम न कोई सेठ सब है समान यही याद रखना है |...ॐD