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अनाथ
दस सालों से सीमा के कोई संतान नहीं है। आज वह एक बच्चे को गोद लेने अनाथाश्रम जा पहुँची। हर तरफ बच्चों को देखकर सोचने लगी कि हाय! इन अनाथों का क्या होगा?"बताइएँ बहनजी? जी बच्चा गोद लेना है।" "अच्छी बात है।" अनाथालय के मालिक ने कहा।
सीमा बच्चों को देखने लगी। तभी उसकी नजर कोने में किताब पढ़ते चिन्टू पर गई। उसने अनाथालय के मालिक से उसका नाम पूछकर बात शुरू की। क्या पढ़ रहे हो चिन्टू? स्कूल का काम कर रहा हूँ। क्या बनना चाहते हो? सीमा ने पूछा 'डाॅक्टर बनकर बच्चों का ईलाज करूंगा।' मासूम चिन्टू बोला। सीमा उसकी मासूमियत देखकर बोली तुम मेरे घर चलो, मैं तुम्हें डॉक्टर बनाऊँगी, तुम्हें परिवार मिलेगा और तुम अनाथ नहीं रहोंगे। "आपसे किसने कहा आंटी मैं अनाथ हूँ ये सब मेरा परिवार है और वैसे भी जिसका कोई नहीं होता उसका ईश्वर होता है और जिसका नाथों का नाथ है फिर वो अनाथ कैसे हुआ?"
सीमा का मुँह खुला रहा गया एक पाँच साल का बच्चा शिक्षक सीमा को अच्छी सीख दे गया। बेटा मेरे कहने का.. चिन्टू बात काटते हुआ बोला 'आंटी आप पिंकी को ले जाए अभी वो बहुत छोटी है। मेरी पढ़ाई यहाँ ठीक चल रही है।' सीमा छह महीने की पिंकी को लेकर घर आ गई। अब वह यह समझ चुकी थी कि हम इन बच्चों को गोद लेकर इन पर कोई अहसान नहीं कर रहे हैं। उसने अपने पिता के राजनैतिक रसूख के चलते अनाथाश्रम का नाम बालाश्रम रखवा दिया है।