#moral stories
मयंक।।
उस रात कुुछ ऐसा हुआ, कि मेरे सारे विचार बदल गए या ऐसा कहे कि मै ही बदल गया। मै रोज की तरह आज भी थका हारा घर मे दाखिल हुआ और सीधा बीवी पर गरजने लगा, उसे अपशब्द सुनाने लगा जेसे वो मेरी गुस्सा उतारने की जागीर हो। मेरी बीवी चुपचाप मेरे कड़वे शब्द सुनती रही उसने मुझे कहा खाना लगा देती हूँ, खा लिजिये। आज मै नशे मे नही था इसलिये मुझे ख्याल है क्या हो रहा था। इतने मे मैने खाने को ठुकराया और सिगरेट पीने लगा उतने मे मेरा 11 साल का बेटा मयंक आकर मुझसे पूछता है, पापा मैं कब सिग्रेट पियुंगा, मैं कब मम्मी पर गुस्सा करूँगा? उसके इन शब्दों ने मेरे दिल पर एसा वार किया जेसे लगा की मै कितना बुरा इन्सान हूँ, मेरी सारी गल्तियां मेरी आंखो के सामने थी। मै खुदको कोश रहा था और फिर मैं झट से उठा मेरी बीवी के पास गया और उसके हाथों मे हाथ रखकर बोला, मुझे माफ करदो अंजलि।।
स्वरचित
पुनीत सिंह
puneetdec@gmail.com