"हर घड़ी तुमको गाता हूँ"
तेरे बिन जिंदगी का पथ,
बड़ा मुश्किल सा लगता था,
तेरे आ जाने से राहों में मेरी,
घास उग आयी,
ये माना कि नहीं हूँ आदमी,
मैं दस करोड़ी का,
तेरे आ जाने से राहों में मेरी,
आस उग आयी,
मुझे जन्नत की नहीं चाहत,
तुझमें जन्नत को पाता हूँ,
है नहीं याद मुझे कुछ और,
हर घड़ी तुमको गाता हूँ।।
-कवि राकेश सागर