#moral stories
॥ उसका बिजनेस ॥
राजकुमार जी एक दिन मैं दुकान पर बैठे हुए थे तभी वहां पर एक भिखारी आया और कहने लगा-“ बाबूजी मुझे दस रूपए दे दो बहुत भूखा हूँ। “
राजकुमार जी ने उस फटे हाल गंदे से नौजवान भिखारी को देखकर उन्हें बहुत बुरा लगा कि यह हट्टा -कट्टा नौजवान काम न करके दयनीय हालत बनाकर भीख मांगता है ।
राजकुमार जी को सोचते हुए देखकर उसने अपने पेट की तरफ इशारा करते हुए कहा पुनः अपनी बात दोहराई । राजकुमार जी ने तरस खाते हुए तुरंत नौकर को भेजकर खाना मंगवा कर उसे खाने को दिया । उसने खाना लेकर अपने थैले मे रख लिया और फिर राजकुमार जी से दस रुपए माँगने लगा ।
राजकुमार जी –“ अब तो तुम्हें खाना मिल गया फिर दस रुपए की क्या जरूरत ।“
वह खाने को बड़ी उपेक्षा की नजर से देखता हुआ –“ साहब ! मैं रूपए लेता हूं ।“
जब रुपये लेना है तो मेहनत से काम करो भीख क्यो माँगते हो ?”
अब वह अपनी दीनता छोड़कर बडे रहस्यात्मक ढंग से –“ साहब जैसे आप अपना बिजनेस करते हैं वैसे ही यह मेरा बिजनेस है । आप अपना काम करिए मुझे अपना काम करने दे । जब लोग मुझको ऐसे ही खाना औंर रुपए दे देते हैं तो मुझे काम करने की क्या जरूरत है ? साहब अपने पैसे औंर अपना ज्ञान अपने पास ही रखो । मेरे धंधे पर लात मत मारो “। कहकर बडबडाता हुआ चला गया । राजकुमार जी उसे आवाक से देखते रह गए।
#नमिता "प्रकाश"