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तुम कमज़ोर नहीं
कीर्ती कॉलेज के लिए तैयार होने में वक्त लगा रही थी। उसकी मम्मी ने देर करने के लिए उसे टोंकते हुए कहा कि तुम इतनी देर क्यों लगा रही हो। क्या दूसरे ही दिन कॉलेज पहुँचने में देर करोगी।
पर कीर्ती का मन कॉलेज जाने का नहीं हो रहा था। वह कल कॉलेज के उन गुंडों से डर गई थी। वह परिचय के नाम पर रैगिंग कर रहे थे। उसे इधर उधर हाथ लगा रहे थे। वह इतनी डरी हुई थी कि कॉलेज बदलने का विचार भी उसके मन में आया था।
उसे जल्दी ना करते देख मम्मी कमरे में आईं। उनके पूँछने पर कीर्ती ने सारी बात बता दी।
"मम्मी मैं इस कॉलेज में नहीं पढूंगी। प्लीज़ दूसरी जगह मेरा दाखिला करवा दीजिए।"
उसकी मम्मी गंभीर होकर बोलीं।
"बेटा भागना किसी समस्या का हल नहीं है। क्या गारंटी है कि वहाँ यह सब नहीं होगा। या राह चलते कोई ऐसी हरकत नहीं करेगा। क्या तब खुद को घर में बंद कर लोगी।"
कीर्ती अपनी मम्मी की बात पर विचार करने लगी। मम्मी ने उसे और समझाया।
"कीर्ती खुद को कमज़ोर नहीं ताकतवर बनाओ।"
मम्मी की बात सुन कर कीर्ती का डर खत्म हो गया था। उसने तय किया कि अब जो होगा उसका बिना डरे डट कर सामना करेगी। पर कॉलेज छोड़ने के बारे में नहीं सोंचेगी।