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सेतु
माँ : लड़की दो घरों के बीच का सेतु है , यदि वो एक देहरी लांघ कर दूसरी देहरी की लक्ष्मी बनती है तो दोनो ही कुल वंश के लोगों के मध्य सम्बन्ध स्थापित होता है ,जैसे नदी के दो किनारों को सेतु मिलाता है , उन्हें जोड़ने का कार्य करता है वैसे ही एक गुणवती कन्या दो कुलों को एक करती है..और दुर्गम रास्ते को सुगम बनाती है।
लड़की का गूढ़ प्रश्न ; 'किंतु क्या उस सेतु से एक ही ओर के लोग रास्ता पार करते हैं ? एक ही कुल के लोगों को दूसरे कुल के लोगों के सम्मान की चिंता होगी ? क्या कन्या का कुल ही सम्मान हेतु प्रतिबद्ध है ? वरपक्ष की कोई जिम्मेदारी नही ? यदि कन्या दो कुलों का सम्बंध जोड़ती है,तो क्या वर उस सम्बन्ध को बनाये रखने के प्रति सचेत होता है? क्या सेतु से गमन ही होता है ,आवागमन नही ?
✍️कविता जयन्त