Hindi Quote in Story by kavita jayant Srivastava

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#moralstories

#निशान

"श्रुति,तुम्हारे पापा आज भी मुझसे कटे कटे ही क्यों रहते हैं ,अब तो मैं पहले जैसा नही रहा माफी भी मांग चुका हूँ पर वो आज तक ऐंठे हैं"

अमन की बातों ने उसके मन को उलझा दिया वो डर गई कि अब उलझ जाऊंगी पति व पिता के बीच!और समझ नही पाएगी की, किसे दोष दे और किसे नही,घर मे इलेक्ट्रीशियन लगे हुए थे,अमन उन्हें इंस्ट्रक्शन भी दे रहा था,पापा का फोन आने पर जब उसने श्रुति का फोन उठा लिया तो,पापा ने औपचारिक बातें करके फ़ोन रख दिया होगा..वो जानती है पापा उससे बातें नही करेंगे..!वो पिछली बातें भूल नही पाते..उसे याद है माँ कितनी परेशान रहती थी पापा के स्वभाव के कारण..पर अमन दामाद हैं,पापा लड़ नही सकते,श्रुति खुद ही रोक लेती है उन्हें..! कितनी बार पहले जब अमन और श्रुति के झगड़े हुए तब पापा ने अमन को फटकारना चाहा था पर हर बार वो उन्हें रोक लेती ,वो जानती थी अमन सुधर जाएंगे और वो सुधर भी गए पर पापा के मन मे जो गांठ पड़ गयी थी वो सुलझ नही सकती।

'अरे क्या सोच रही हो तुम ? कबसे तुम्हे आवाज लगा रहा हूं अमन की आवाज ने उसकी तंद्रा भंग की..देखो न श्रुति ये कील गलत ठोंक दी थी उसने,मैंने निकाल तो दी पर दीवार खराब हो गयी ,निशान बना रह गया!

" सही कहा,कील तो निकल जाती है पर निशान रह जाता है अमन..तुम ये सब देखो मैं आती हूं
पापा का फोन फिर से आ रहा है।

✍️-कविता जयन्त

Hindi Story by kavita jayant Srivastava : 111126821
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