#Moralstories
जल्दी क्या है..
क्लास से निकलते हुए भास्कर ने सूरज से कहा।
"आज बड़ी मस्त मूवी रिलीज़ हुई है। चलेगा हमारे साथ।"
"अरे कैसी बातें करते हो ? अभी तो सर ने असाइन्मेंट दिया है। अगले हफ्ते प्रोजक्ट जमा करना है।"
"अगले हफ्ते में अभी दिन हैं।"
"हाँ पर प्रोजक्ट के बारे में मैटीरियल सर्च कर उसे पढूंगा तब लिखूंगा ना।"
"उसकी क्या ज़रूरत है। सब्जेक्ट तो सबका एक ही है। दूसरों को करने दो मेहनत। तुम किसी से लेकर थोड़ा इधर उधर कर छाप लेना।"
"नहीं यार ये तो बेइमानी है।"
भास्कर और उसके साथियों ने एक ठहाका लगाया।
"ठीक है भाई तू ईमानदारी का तमगा जीत। हम चलते हैं।"
भास्कर अक्सर सूरज को इसी तरह भटकाने की कोशिश करता था। लेकिन सूरज ने बचपन से यही सीखा था कि दुनिया की भेड़ चाल में ना पड़ कर अपने मन की सुनो। अपना काम समय पर और ईमानदारी से करो।
सूरज ने प्रोजक्ट के लिए मेहनत की। दिन रात एक कर पांचवें दिन ही प्रोजक्ट सबमिट कर दिया।
भास्कर अपनी चाल में रहा। अगले दिन प्रोजक्ट जमा करना था। पर वह अभी लोगों से मदद मांगता फिर रहा था। जैसे तैसे आखिरी समय में उसने एक लड़की के प्रोजक्ट की कॉपी कर जमा कर दिया।
सूरज का प्रोजक्ट अव्वल नंबर पर रहा। भास्कर को दूसरे का प्रोजक्ट कॉपी करने के लिए डांट पड़ी।