'चैक बुक नहीं क्रेडिट कार्ड हैं लड़कियाँ'
-मनोहर चमोली ‘मनु’
‘‘लड़कियाँ चैक बुक नहीं क्रेडिट कार्ड ही हैं।’’ महिला दिवस के अवसर पर तेज़-तर्रार और कड़क मिज़ाज एस॰एस॰पी॰ चिन्मय खिरोजी मुख्य अतिथि थे। विवाद हो गया। स्कूली छात्राओं ने नारे लगाए-‘‘चीफ गेस्ट गो बैक-गो बैक।’’ बात बढ़ गई थी। छात्राओं ने मंच पर काॅपी-किताबें, कलम-पेंसिलें फेंकनी शुरू कर दीं। स्कूल का कार्यक्रम रद्द हो गया।
तीस बरस बाद अचानक ख़बर आती है-‘अकेले रह गए जाने माने पुलिस अधिकारी खिरोजी।’
पूरा शहर स्तब्ध था। अराजकों ने खिरोजी परिवार की हत्या कर दी थी। खिरोजी उस दिन शहर में नहीं थे।
रिटायर खिरोजी अकेले रह गए। शहर में शोक सभाओं से हटकर कुछ महिलाओं ने दूसरी राह पकड़ ली। वे खिरोजी के घर में चली आईं थीं। कुछ ने सुबह की तो कुछ ने दोपहर की रसोई संभाल ली। कुछ उनकी सेहत का ख्याल रखतीं।घर की सफाई नियमित होने लगीं। कुछ ने बाज़ार की खरीददारी संभाल ली। कुछ ने उनका मोबाइल और इंटरनेट संभाल लिया। धीरे-धीरे खिरोजी दुःख और चिन्ता से बाहर निकल आए।
एक दिन की बात है। शहर की इन महिलाओं ने तीस साल का वह दिन याद दिलाया। नारा याद दिलाया-‘चीफ गेस्ट गो बैक-गो बैक।’ खिरोजी की आँखें भर आईं। कहने लगे,‘‘बेटियों ने साबित कर तो दिया कि वे चैक बुक नहीं क्रेडिट कार्ड ही हैं।’’ आज मुद्दतों बाद खिरोजी के घर से खिलखिलाहटों की ख़ुशबू शहर में फैल गई थीं।
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