महफ़िल में जब भी बाटे तेरी होती है।।
लगता है जैसे तुजसे मेरी मुलाकात सी होती है।।
पलके ज़ुका लेती हूं,की कोई तुजे मेरी आँखों में पढ़ना ले।।
दिल संभाल के बेठी हु,की बढ़ी हुवी धड़कने कोई सुन ना ले।।
नाम तेरा सुनते ही दिल को एक आरामसा मिलता है
जैसे कोई भूले बिसारे को घर से पैगाम सा मिलता है..
सिर्फ तेरी ज़िक्र होने से मेरे वीराने मे बारिश सी होती है।।
की क्या बताव तुझे की मुज़पे खुदाई मेहरबान सी होती है।।
Anv◆