काश के मैं एक लड़का होती
होते सपने मेरी मुट्ठी में।
न मैं एक शरीर होती
न ही मैं घर की इज्जत होती
न ही मैं कमजोर होती
न कभी ए जिल्लत होती
काश के मैं एक लड़का होती
होते सपने मेरी मुट्ठी में..
न छूतीं नजरें किसी की
न कोई घुटन होती
मंजिल मेरी जो भी होती
मैं सिर्फ इंसां होती
हक होता मेरा भी इस दुनिया पर
मेरा भी एक जहां होता
काश मैं एक लड़का होती
होते सपने मुरी मुट्ठी में।।....