थी ख़ामोशी हमारी फितरत में..
तभी तो बरसो निभ गयी लोगो से
अगर मुँह में हमारे जवाब होते..
तो सोचो कितना बवाल होता
हम तो अच्छे थे पर...
लोगो की नज़र में सदा बुरे ही रहे
कहीं हम सच में ख़राब होते...
तो सोचो कितना बवाल होता
समंदर सारे शराब होते...
तो सोचो कितना बवाल होता